tatkathāsu tu vedārthaḥ śloke śloke pade pade|| 65
अर्थ
ऐसी स्थितिमें श्रीमद्भागवत सुनानेसे वे कैसे जगेंगे? क्योंकि उस कथाके प्रत्येक श्लोक और प्रत्येक पदमें भी वेदोंका ही तो सारांश है॥ ६५॥
श्रीमद्भागवतालापात्तत्कथं बोधमेष्यति।
तत्कथासु तु वेदार्थः श्लोके श्लोके पदे पदे॥ ६५
ऐसी स्थितिमें श्रीमद्भागवत सुनानेसे वे कैसे जगेंगे? क्योंकि उस कथाके प्रत्येक श्लोक और प्रत्येक पदमें भी वेदोंका ही तो सारांश है॥ ६५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.2.65 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 46) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/2/65/