तुमने भगवान्की वह आज्ञा स्वीकार कर ली; इससे तुमपर श्रीहरि बहुत प्रसन्न हुए और तुम्हारी सेवा करनेके लिये मुक्तिको तुम्हें दासीके रूपमें दे दिया और इन ज्ञान-वैराग्यको पुत्रोंके रूपमें॥ ७॥✎ 910
अङ्गीकृतं त्वया तद्वै प्रसन्नोऽभूद्धरिस्तदा।
मुक्तिं दासीं ददौ तुभ्यं ज्ञानवैराग्यकाविमौ॥ ७
तुमने भगवान्की वह आज्ञा स्वीकार कर ली; इससे तुमपर श्रीहरि बहुत प्रसन्न हुए और तुम्हारी सेवा करनेके लिये मुक्तिको तुम्हें दासीके रूपमें दे दिया और इन ज्ञान-वैराग्यको पुत्रोंके रूपमें॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.2.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 41) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/2/7/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)