तुम अपने साक्षात् स्वरूपसे वैकुण्ठधाममें ही भक्तोंका पोषण करती हो, भूलोकमें तो तुमने उनकी पुष्टिके लिये केवल छायारूप धारण कर रखा है॥ ८॥✎ 910
पोषणं स्वेन रूपेण वैकुण्ठे त्वं करोषि च।
भूमौ भक्तविपोषाय छायारूपं त्वया कृतम्॥ ८
तुम अपने साक्षात् स्वरूपसे वैकुण्ठधाममें ही भक्तोंका पोषण करती हो, भूलोकमें तो तुमने उनकी पुष्टिके लिये केवल छायारूप धारण कर रखा है॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.2.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 41) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/2/8/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)