यह भागवतपुराण वेदोंके समान है। श्रीव्यासदेवने इसे भक्ति, ज्ञान और वैराग्यकी स्थापनाके लिये प्रकाशित किया है॥ ७१॥✎ 1565
इदं भागवतं नाम पुराणं ब्रह्मसम्मितम्।
भक्तिज्ञानविरागाणां स्थापनाय प्रकाशितम्॥ ७१
यह भागवतपुराण वेदोंके समान है। श्रीव्यासदेवने इसे भक्ति, ज्ञान और वैराग्यकी स्थापनाके लिये प्रकाशित किया है॥ ७१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.2.71 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 46) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/2/71/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)