pṛthagbhūtā ca sā miṣṭā tathā bhāgavatī kathā|| 70
अर्थ
खाँड ईखके ओर-छोर और बीचमें भी व्याप्त रहती है, तथापि अलग होनेपर उसकी कुछ और ही मिठास होती है। ऐसी ही यह भागवतकी कथा है॥ ७०॥✎ 1565
ईक्षूणामपि मध्यान्तं शर्करा व्याप्य तिष्ठति।
पृथग्भूता च सा मिष्टा तथा भागवती कथा॥ ७०
खाँड ईखके ओर-छोर और बीचमें भी व्याप्त रहती है, तथापि अलग होनेपर उसकी कुछ और ही मिठास होती है। ऐसी ही यह भागवतकी कथा है॥ ७०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.2.70 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 46) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/2/70/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)