श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.2.73

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

तदा त्वया पुरा प्रोक्तं चतुःश्लोकसमन्वितम्।

तदीयश्रवणात्सद्यो निर्बाधो बादरायणः॥ ७३

tadā tvayā purā proktaṃ catuḥślokasamanvitam|

tadīyaśravaṇātsadyo nirbādho bādarāyaṇaḥ|| 73

अर्थ

पूर्वकालमें जिस समय वेद-वेदान्तके पारगामी और गीताकी भी रचना करनेवाले भगवान् व्यासदेव खिन्‍न होकर अज्ञानसमुद्रमें गोते खा रहे थे, उस समय आपने ही उन्हें चार श्लोकोंमें इसका उपदेश किया था। उसे सुनते ही उनकी सारी चिन्ता दूर हो गयी थी॥ ७२-७३॥✎ 1565

यह अर्थ श्लोक 72–73 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1565 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: श्रीमद्भागवत-पुराण → श्रीमद्भागवतपुराण

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