फिर इसमें आपको आश्चर्य क्यों हो रहा है, जो आप हमसे प्रश्न कर रहे हैं? आपको उन्हें शोक और दुःखका विनाश करनेवाला श्रीमद्भागवतपुराण ही सुनाना चाहिये॥ ७४॥✎ 1565
तत्र ते विस्मयः केन यतः प्रश्नकरो भवान्।
श्रीमद्भागवतं श्राव्यं शोकदुःखविनाशनम्॥ ७४
फिर इसमें आपको आश्चर्य क्यों हो रहा है, जो आप हमसे प्रश्न कर रहे हैं? आपको उन्हें शोक और दुःखका विनाश करनेवाला श्रीमद्भागवतपुराण ही सुनाना चाहिये॥ ७४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.2.74 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 46) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/2/74/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)