श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.3.14

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

योगेश्‍वरौ व्यासपराशरौ च छायाशुको जाजलिजह्नुमुख्याः।

सर्वेऽप्यमी मुनिगणाः सहपुत्रशिष्याः स्वस्त्रीभिराययुरतिप्रणयेन युक्ताः॥ १४

yogeśvarau vyāsaparāśarau ca chāyāśuko jājalijahnumukhyāḥ|

sarve'pyamī munigaṇāḥ sahaputraśiṣyāḥ svastrībhirāyayuratipraṇayena yuktāḥ|| 14

अर्थ

भृगु, वसिष्ठ, च्यवन, गौतम, मेधातिथि, देवल, देवरात, परशुराम, विश्वामित्र, शाकल, मार्कण्डेय, दत्तात्रेय, पिप्पलाद, योगेश्‍वर व्यास और पराशर, छायाशुक, जाजलि और जह्नु आदि सभी प्रधान-प्रधान मुनिगण अपने-अपने पुत्र, शिष्य और स्त्रियोंसमेत बड़े प्रेमसे वहाँ आये॥ १३-१४॥✎ 1267 1268

यह अर्थ श्लोक 13–14 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1267 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): श्रीमद्भागवता-मृतका → श्रीमद्भागवतामृतका
  • #1268 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): श्रीमद्भागवत-कथामृतका → श्रीमद्भागवतकथामृतका

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