श्रीमद्भागवतकी कथाका सदा-सर्वदा सेवन, आस्वादन करना चाहिये। इसके श्रवणमात्रसे श्रीहरि हृदयमें आ विराजते हैं॥ २५॥✎ 1567
सदा सेव्या सदा सेव्या श्रीमद्भागवती कथा।
यस्याः श्रवणमात्रेण हरिश्चित्तं समाश्रयेत्॥ २५
श्रीमद्भागवतकी कथाका सदा-सर्वदा सेवन, आस्वादन करना चाहिये। इसके श्रवणमात्रसे श्रीहरि हृदयमें आ विराजते हैं॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.3.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 49) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/3/25/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)