श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.3.25

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

सदा सेव्या सदा सेव्या श्रीमद्भागवती कथा।

यस्याः श्रवणमात्रेण हरिश्चित्तं समाश्रयेत्॥ २५

sadā sevyā sadā sevyā śrīmadbhāgavatī kathā|

yasyāḥ śravaṇamātreṇa hariścittaṃ samāśrayet|| 25

अर्थ

श्रीमद्भागवतकी कथाका सदा-सर्वदा सेवन, आस्वादन करना चाहिये। इसके श्रवणमात्रसे श्रीहरि हृदयमें आ विराजते हैं॥ २५॥✎ 1567

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1567 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: शुकशास्त्र-की → शुकशास्त्रकी

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