जिस घरमें नित्यप्रति श्रीमद्भागवतकी कथा होती है, वह तीर्थरूप हो जाता है और जो लोग उसमें रहते हैं, उनके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं॥ २९॥✎ 1567
कथा भागवतस्यापि नित्यं भवति यद्गृहे।
तद्गृहं तीर्थरूपं हि वसतां पापनाशनम्॥ २९
जिस घरमें नित्यप्रति श्रीमद्भागवतकी कथा होती है, वह तीर्थरूप हो जाता है और जो लोग उसमें रहते हैं, उनके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.3.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 49) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/3/29/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)