हजारों अश्वमेध और सैकड़ों वाजपेय यज्ञ इस शुकशास्त्रकी कथाका सोलहवाँ अंश भी नहीं हो सकते॥ ३०॥✎ 1567
अश्वमेधसहस्राणि वाजपेयशतानि च।
शुकशास्त्रकथायाश्च कलां नार्हन्ति षोडशीम्॥ ३०
हजारों अश्वमेध और सैकड़ों वाजपेय यज्ञ इस शुकशास्त्रकी कथाका सोलहवाँ अंश भी नहीं हो सकते॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.3.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 49) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/3/30/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)