जो पुरुष अन्तसमयमें श्रीमद्भागवतका वाक्य सुन लेता है, उसपर प्रसन्न होकर भगवान् उसे वैकुण्ठधाम देते हैं॥ ४०॥
अन्तकाले तु येनैव श्रूयते शुकशास्त्रवाक्।
प्रीत्या तस्यैव वैकुण्ठं गोविन्दोऽपि प्रयच्छति॥ ४०
जो पुरुष अन्तसमयमें श्रीमद्भागवतका वाक्य सुन लेता है, उसपर प्रसन्न होकर भगवान् उसे वैकुण्ठधाम देते हैं॥ ४०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.3.40 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 50) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/3/40/