श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.3.40

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

अन्तकाले तु येनैव श्रूयते शुकशास्त्रवाक्।

प्रीत्या तस्यैव वैकुण्ठं गोविन्दोऽपि प्रयच्छति॥ ४०

antakāle tu yenaiva śrūyate śukaśāstravāk|

prītyā tasyaiva vaikuṇṭhaṃ govindo'pi prayacchati|| 40

अर्थ

जो पुरुष अन्तसमयमें श्रीमद्भागवतका वाक्य सुन लेता है, उसपर प्रसन्‍न होकर भगवान् उसे वैकुण्ठधाम देते हैं॥ ४०॥

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