kṛṣṇena saha sāyujyaṃ sa pumām̐llabhate dhruvam|| 41
अर्थ
जो पुरुष इसे सोनेके सिंहासनपर रखकर विष्णुभक्तको दान करता है, वह अवश्य ही भगवान्का सायुज्य प्राप्त करता है॥ ४१॥
हेमसिंहयुतं चैतद्वैष्णवाय ददाति च।
कृष्णेन सह सायुज्यं स पुमाँल्लभते ध्रुवम्॥ ४१
जो पुरुष इसे सोनेके सिंहासनपर रखकर विष्णुभक्तको दान करता है, वह अवश्य ही भगवान्का सायुज्य प्राप्त करता है॥ ४१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.3.41 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 50) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/3/41/