श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.3.46

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

सत्येन ब्रह्मचर्येण सर्वदा श्रवणं मतम्।

अशक्यत्वात्कलौ बोध्यो विशेषोऽत्र शुकाज्ञया॥ ४६

satyena brahmacaryeṇa sarvadā śravaṇaṃ matam|

aśakyatvātkalau bodhyo viśeṣo'tra śukājñayā|| 46

अर्थ

इसे सत्यभाषण और ब्रह्मचर्यपालनपूर्वक सर्वदा ही सुनना श्रेष्ठ माना गया है। किन्तु कलियुगमें ऐसा होना कठिन है; इसलिये इसकी शुकदेवजीने जो विशेष विधि बतायी है, वह जान लेनी चाहिये॥ ४६॥

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