श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.3.47

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

मनोवृत्तिजयश्चैव नियमाचरणं तथा।

दीक्षा कर्तुमशक्यत्वात्सप्ताहश्रवणं मतम्॥ ४७

manovṛttijayaścaiva niyamācaraṇaṃ tathā|

dīkṣā kartumaśakyatvātsaptāhaśravaṇaṃ matam|| 47

अर्थ

कलियुगमें बहुत दिनोंतक चित्तकी वृत्तियोंको वशमें रखना, नियमोंमें बँधे रहना और किसी पुण्यकार्यके लिये दीक्षित रहना कठिन है; इसलिये सप्ताहश्रवणकी विधि है॥ ४७॥

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