श्रद्धापूर्वक कभी भी श्रवण करनेसे अथवा माघमासमें श्रवण करनेसे जो फल होता है, वही फल श्रीशुकदेवजीने सप्ताहश्रवणमें निर्धारित किया है॥ ४८॥
श्रद्धातः श्रवणे नित्यं माघे तावद्धि यत्फलम्।
तत्फलं शुकदेवेन सप्ताहश्रवणे कृतम्॥ ४८
श्रद्धापूर्वक कभी भी श्रवण करनेसे अथवा माघमासमें श्रवण करनेसे जो फल होता है, वही फल श्रीशुकदेवजीने सप्ताहश्रवणमें निर्धारित किया है॥ ४८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.3.48 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 51) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/3/48/