सूतजीने कहा—शौनकजी! जब भगवान् श्रीकृष्ण इस धराधामको छोड़कर अपने नित्यधामको जाने लगे, तब उनके मुखारविन्दसे एकादश स्कन्धका ज्ञानोपदेश सुनकर भी उद्धवजीने पूछा॥ ५४॥
यदा कृष्णो धरां त्यक्त्वा स्वपदं गन्तुमुद्यतः।
एकादशं परिश्रुत्याप्युद्धवो वाक्यमब्रवीत्॥ ५४
सूतजीने कहा—शौनकजी! जब भगवान् श्रीकृष्ण इस धराधामको छोड़कर अपने नित्यधामको जाने लगे, तब उनके मुखारविन्दसे एकादश स्कन्धका ज्ञानोपदेश सुनकर भी उद्धवजीने पूछा॥ ५४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.3.54 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 51) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/3/54/