श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.10

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

के के विशुद्ध्यन्ति वदन्तु मह्यं सप्ताहयज्ञेन कथामयेन।

कृपालुभिर्लोकहितं विचार्य प्रकाशितः कोऽपि नवीनमार्गः॥ १०

ke ke viśuddhyanti vadantu mahyaṃ saptāhayajñena kathāmayena|

kṛpālubhirlokahitaṃ vicārya prakāśitaḥ ko'pi navīnamārgaḥ|| 10

अर्थ

मुनिवर! आपलोग बड़े कृपालु हैं, आपने संसारके कल्याणका विचार करके यह बिलकुल निराला ही मार्ग निकाला है। आप कृपया यह तो बताइये कि इस कथारूप सप्ताहयज्ञके द्वारा संसारमें कौन-कौन लोग पवित्र हो जाते हैं॥ १०॥

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