श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.9

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

अतो नृलोके ननु नास्ति किञ्चिच्चित्तस्य शोधाय कलौ पवित्रम्। ✎ 1495

अघौघविध्वंसकरं तथैव कथासमानं भुवि नास्ति चान्यत्॥ ९

ato nṛloke nanu nāsti kiñciccittasya śodhāya kalau pavitram|

aghaughavidhvaṃsakaraṃ tathaiva kathāsamānaṃ bhuvi nāsti cānyat|| 9

अर्थ

अतः इसमें संदेह नहीं कि कलिकालमें चित्तकी शुद्धिके लिये इस भागवतकथाके समान मर्त्यलोकमें पापपुंजका नाश करनेवाला कोई दूसरा पवित्र साधन नहीं है॥ ९॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1495 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: किञ्चि- च्चित्तस्य → किञ्चिच्चित्तस्य

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