श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.16

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

तुङ्गभद्रातटे पूर्वमभूत्पत्तनमुत्तमम्।

यत्र वर्णाः स्वधर्मेण सत्यसत्कर्मतत्पराः॥ १६

tuṅgabhadrātaṭe pūrvamabhūtpattanamuttamam|

yatra varṇāḥ svadharmeṇa satyasatkarmatatparāḥ|| 16

अर्थ

पूर्वकालमें तुंगभद्रा नदीके तटपर एक अनुपम नगर बसा हुआ था। वहाँ सभी वर्णोंके लोग अपने-अपने धर्मोंका आचरण करते हुए सत्य और सत्कर्मोंमें तत्पर रहते थे॥ १६॥

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