natvā ca pādayostasya niḥśvasan saṃsthitaḥ puraḥ|| 25
अर्थ
जब ब्राह्मणदेवताने देखा कि वे जल पी चुके हैं, तब वह उनके पास गया और चरणोंमें नमस्कार करनेके बाद सामने खड़े होकर लंबी-लंबी साँसें लेने लगा॥ २५॥
दृष्ट्वा पीतजलं तं तु विप्रो यातस्तदन्तिकम्।
नत्वा च पादयोस्तस्य निःश्वसन् संस्थितः पुरः॥ २५
जब ब्राह्मणदेवताने देखा कि वे जल पी चुके हैं, तब वह उनके पास गया और चरणोंमें नमस्कार करनेके बाद सामने खड़े होकर लंबी-लंबी साँसें लेने लगा॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.4.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 56) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/4/25/