श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.26

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

यतिरुवाच

कथं रोदिषि विप्र त्वं का ते चिन्ता बलीयसी।

वद त्वं सत्वरं मह्यं स्वस्य दुःखस्य कारणम्॥ २६

kathaṃ rodiṣi vipra tvaṃ kā te cintā balīyasī|

vada tvaṃ satvaraṃ mahyaṃ svasya duḥkhasya kāraṇam|| 26

अर्थ

संन्यासीने पूछा—कहो, ब्राह्मणदेवता! रोते क्यों हो? ऐसी तुम्हें क्या भारी चिन्ता है? तुम जल्दी ही मुझे अपने दुःखका कारण बताओ॥ २६॥

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