yo mayā ropito vṛkṣaḥ so'pi vandhyatvamāśrayet|| 30
अर्थ
मैं जिस गायको पालता हूँ, वह भी सर्वथा बाँझ हो जाती है; जो पेड़ लगाता हूँ, उसपर भी फल-फूल नहीं लगते॥ ३०॥
पाल्यते या मया धेनुः सा वन्ध्या सर्वथा भवेत्।
यो मया रोपितो वृक्षः सोऽपि वन्ध्यत्वमाश्रयेत्॥ ३०
मैं जिस गायको पालता हूँ, वह भी सर्वथा बाँझ हो जाती है; जो पेड़ लगाता हूँ, उसपर भी फल-फूल नहीं लगते॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.4.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 57) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/4/30/