श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.31

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

यत्फलं मद‍्गृहायातं तच्च शीघ्रं विनश्यति।

निर्भाग्यस्यानपत्यस्य किमतो जीवितेन मे॥ ३१

yatphalaṃ madgṛhāyātaṃ tacca śīghraṃ vinaśyati|

nirbhāgyasyānapatyasya kimato jīvitena me|| 31

अर्थ

मेरे घरमें जो फल आता है, वह भी बहुत जल्दी सड़ जाता है। जब मैं ऐसा अभागा और पुत्रहीन हूँ, तब फिर इस जीवनको ही रखकर मुझे क्या करना है॥ ३१॥

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