॥ श्रीहरिः ॥
संततेः सगरो दुःखमवापाङ्गः पुरा तथा।
रे मुञ्चाद्य कुटुम्बाशां संन्यासे सर्वथा सुखम्॥ ३६
saṃtateḥ sagaro duḥkhamavāpāṅgaḥ purā tathā|
re muñcādya kuṭumbāśāṃ saṃnyāse sarvathā sukham|| 36
अर्थ
पूर्वकालमें राजा सगर एवं अंगको सन्तानके कारण दुःख भोगना पड़ा था। ब्राह्मण! अब तुम कुटुम्बकी आशा छोड़ दो। संन्यासमें ही सब प्रकारका सुख है॥ ३६॥
संततेः सगरो दुःखमवापाङ्गः पुरा तथा।
रे मुञ्चाद्य कुटुम्बाशां संन्यासे सर्वथा सुखम्॥ ३६
पूर्वकालमें राजा सगर एवं अंगको सन्तानके कारण दुःख भोगना पड़ा था। ब्राह्मण! अब तुम कुटुम्बकी आशा छोड़ दो। संन्यासमें ही सब प्रकारका सुख है॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.4.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 57) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/4/36/