श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.37

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

ब्राह्मण उवाच

विवेकेन भवेत्किं मे पुत्रं देहि बलादपि।

नो चेत्त्यजाम्यहं प्राणांस्त्वदग्रे शोकमूर्च्छितः॥ ३७

vivekena bhavetkiṃ me putraṃ dehi balādapi|

no cettyajāmyahaṃ prāṇāṃstvadagre śokamūrcchitaḥ|| 37

अर्थ

ब्राह्मणने कहा—महात्माजी! विवेकसे मेरा क्या होगा। मुझे तो बलपूर्वक पुत्र दीजिये; नहीं तो मैं आपके सामने ही शोकमूर्च्छित होकर अपने प्राण त्यागता हूँ ॥ ३७॥

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