श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.41

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

तस्याग्रहं समालोक्य फलमेकं स दत्तवान्।

इदं भक्षय पत्न्या त्वं ततः पुत्रो भविष्यति॥ ४१

tasyāgrahaṃ samālokya phalamekaṃ sa dattavān|

idaṃ bhakṣaya patnyā tvaṃ tataḥ putro bhaviṣyati|| 41

अर्थ

जब महात्माजीने देखा कि यह किसी प्रकार अपना आग्रह नहीं छोड़ता, तब उन्होंने उसे एक फल देकर कहा—‘इसे तुम अपनी पत्नीको खिला देना, इससे उसके एक पुत्र होगा॥ ४१॥ तुम्हारी स्त्रीको एक सालतक सत्य, शौच, दया, दान और एक समय एक ही अन्‍न खानेका नियम रखना चाहिये। यदि वह ऐसा करेगी तो बालक बहुत शुद्ध स्वभाववाला होगा’॥ ४२॥

यह व्याख्या श्लोक PRE.4.41 से PRE.4.42 तककी एक साथ है।

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