ato haṭhena yukto'si hyarthinaṃ kiṃ vadāmyaham|| 40
अर्थ
इसलिये दैव जिसके उद्योगको कुचल देता है, उस पुरुषके समान तुम्हें भी पुत्रसे सुख नहीं मिल सकेगा। तुमने तो बड़ा हठ पकड़ रखा है और अर्थीके रूपमें तुम मेरे सामने उपस्थित हो; ऐसी दशामें मैं तुमसे क्या कहूँ’॥ ४०॥
न यास्यसि सुखं पुत्राद्यथा दैवहतोद्यमः।
अतो हठेन युक्तोऽसि ह्यर्थिनं किं वदाम्यहम्॥ ४०
इसलिये दैव जिसके उद्योगको कुचल देता है, उस पुरुषके समान तुम्हें भी पुत्रसे सुख नहीं मिल सकेगा। तुमने तो बड़ा हठ पकड़ रखा है और अर्थीके रूपमें तुम मेरे सामने उपस्थित हो; ऐसी दशामें मैं तुमसे क्या कहूँ’॥ ४०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.4.40 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 57) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/4/40/