श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.39

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

इति विप्राग्रहं दृष्ट्वा प्राब्रवीत्स तपोधनः।

चित्रकेतुर्गतः कष्टं विधिलेखविमार्जनात्॥ ३९

iti viprāgrahaṃ dṛṣṭvā prābravītsa tapodhanaḥ|

citraketurgataḥ kaṣṭaṃ vidhilekhavimārjanāt|| 39

अर्थ

ब्राह्मणका ऐसा आग्रह देखकर उन तपोधनने कहा, ‘विधाताके लेखको मिटानेका हठ करनेसे राजा चित्रकेतुको बड़ा कष्ट उठाना पड़ा था॥ ३९॥

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