श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.52

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

दुर्बला तेन दुःखेन ह्यनुजे करवाणि किम्।

साब्रवीन्मम गर्भोऽस्ति तं दास्यामि प्रसूतितः॥ ५२

durbalā tena duḥkhena hyanuje karavāṇi kim|

sābravīnmama garbho'sti taṃ dāsyāmi prasūtitaḥ|| 52

अर्थ

मैं इस दुःखके कारण दिनोंदिन दुबली हो रही हूँ। बहिन! मैं क्या करूँ?’ बहिनने कहा, ‘मेरे पेटमें बच्चा है, प्रसव होनेपर वह बालक मैं तुझे दे दूँगी॥ ५२॥✎ 1569

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1569 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: गुप्त-रूपसे → गुप्तरूपसे

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