मैं इस दुःखके कारण दिनोंदिन दुबली हो रही हूँ। बहिन! मैं क्या करूँ?’ बहिनने कहा, ‘मेरे पेटमें बच्चा है, प्रसव होनेपर वह बालक मैं तुझे दे दूँगी॥ ५२॥✎ 1569
दुर्बला तेन दुःखेन ह्यनुजे करवाणि किम्।
साब्रवीन्मम गर्भोऽस्ति तं दास्यामि प्रसूतितः॥ ५२
मैं इस दुःखके कारण दिनोंदिन दुबली हो रही हूँ। बहिन! मैं क्या करूँ?’ बहिनने कहा, ‘मेरे पेटमें बच्चा है, प्रसव होनेपर वह बालक मैं तुझे दे दूँगी॥ ५२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.4.52 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 59) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/4/52/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)