श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.53

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

तावत्कालं सगर्भेव गुप्ता तिष्ठ गृहे सुखम्।

वित्तं त्वं मत्पतेर्यच्छ स ते दास्यति बालकम्॥ ५३

tāvatkālaṃ sagarbheva guptā tiṣṭha gṛhe sukham|

vittaṃ tvaṃ matpateryaccha sa te dāsyati bālakam|| 53

अर्थ

तबतक तू गर्भवतीके समान घरमें गुप्तरूपसे सुखसे रह। तू मेरे पतिको कुछ धन दे देगी तो वे तुझे अपना बालक दे देंगे॥ ५३॥✎ 1569

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1569 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: गुप्त-रूपसे → गुप्तरूपसे

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