और उसने आत्मदेवको सूचना दे दी कि मेरे सुखपूर्वक बालक हो गया है। इस प्रकार आत्मदेवके पुत्र हुआ सुनकर सब लोगोंको बड़ा आनन्द हुआ॥ ५७॥
तया च कथितं भर्त्रे प्रसूतः सुखमर्भकः।
लोकस्य सुखमुत्पन्नमात्मदेवप्रजोदयात्॥ ५७
और उसने आत्मदेवको सूचना दे दी कि मेरे सुखपूर्वक बालक हो गया है। इस प्रकार आत्मदेवके पुत्र हुआ सुनकर सब लोगोंको बड़ा आनन्द हुआ॥ ५७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.4.57 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 59) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/4/57/