॥ श्रीहरिः ॥
ददौ दानं द्विजातिभ्यो जातकर्म विधाय च।
गीतवादित्रघोषोऽभूत्तद्द्वारे मङ्गलं बहु॥ ५८
dadau dānaṃ dvijātibhyo jātakarma vidhāya ca|
gītavāditraghoṣo'bhūttaddvāre maṅgalaṃ bahu|| 58
अर्थ
ब्राह्मणने उसका जातकर्म-संस्कार करके ब्राह्मणोंको दान दिया और उसके द्वारपर गाना-बजाना तथा अनेक प्रकारके मांगलिक कृत्य होने लगे ॥ ५८॥
ददौ दानं द्विजातिभ्यो जातकर्म विधाय च।
गीतवादित्रघोषोऽभूत्तद्द्वारे मङ्गलं बहु॥ ५८
ब्राह्मणने उसका जातकर्म-संस्कार करके ब्राह्मणोंको दान दिया और उसके द्वारपर गाना-बजाना तथा अनेक प्रकारके मांगलिक कृत्य होने लगे ॥ ५८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.4.58 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 59) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/4/58/