श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.59

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

भर्तुरग्रेऽब्रवीद्वाक्यं स्तन्यं नास्ति कुचे मम।

अन्यस्तन्येन निर्दुग्धा कथं पुष्णामि बालकम्॥ ५९

bharturagre'bravīdvākyaṃ stanyaṃ nāsti kuce mama|

anyastanyena nirdugdhā kathaṃ puṣṇāmi bālakam|| 59

अर्थ

धुन्धुलीने अपने पतिसे कहा, ‘मेरे स्तनोंमें तो दूध ही नहीं है; फिर गौ आदि किसी अन्य जीवके दूधसे मैं इस बालकका किस प्रकार पालन करूँगी? ॥ ५९॥

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