तब पुत्रकी रक्षाके लिये आत्मदेवने वैसा ही किया तथा माता धुन्धुलीने उस बालकका नाम धुन्धुकारी रखा॥ ६१॥
पतिना तत्कृतं सर्वं पुत्ररक्षणहेतवे।
पुत्रस्य धुन्धुकारीति नाम मात्रा प्रतिष्ठितम्॥ ६१
तब पुत्रकी रक्षाके लिये आत्मदेवने वैसा ही किया तथा माता धुन्धुलीने उस बालकका नाम धुन्धुकारी रखा॥ ६१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.4.61 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 59) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/4/61/