॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक PRE.4.62
त्रिमासे निर्गते चाथ सा धेनुः सुषुवेऽर्भकम्।
सर्वाङ्गसुन्दरं दिव्यं निर्मलं कनकप्रभम्॥ ६२
trimāse nirgate cātha sā dhenuḥ suṣuve'rbhakam|
sarvāṅgasundaraṃ divyaṃ nirmalaṃ kanakaprabham|| 62
अर्थ
इसके बाद तीन महीने बीतनेपर उस गौके भी एक मनुष्याकार बच्चा हुआ। वह सर्वांगसुन्दर, दिव्य, निर्मल तथा सुवर्णकी-सी कान्तिवाला था॥ ६२॥