श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.63

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

दृष्ट्वा प्रसन्‍नो विप्रस्तु संस्कारान् स्वयमादधे।

मत्वाऽऽश्‍चर्यं जनाः सर्वे दिदृक्षार्थं समागताः॥ ६३

dṛṣṭvā prasanno viprastu saṃskārān svayamādadhe|

matvā''ścaryaṃ janāḥ sarve didṛkṣārthaṃ samāgatāḥ|| 63

अर्थ

उसे देखकर ब्राह्मणदेवताको बड़ा आनन्द हुआ और उसने स्वयं ही उसके सब संस्कार किये। इस समाचारसे और सब लोगोंको भी बड़ा आश्‍चर्य हुआ और वे बालकको देखनेके लिये आये॥ ६३॥

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