उसे देखकर ब्राह्मणदेवताको बड़ा आनन्द हुआ और उसने स्वयं ही उसके सब संस्कार किये। इस समाचारसे और सब लोगोंको भी बड़ा आश्चर्य हुआ और वे बालकको देखनेके लिये आये॥ ६३॥
दृष्ट्वा प्रसन्नो विप्रस्तु संस्कारान् स्वयमादधे।
मत्वाऽऽश्चर्यं जनाः सर्वे दिदृक्षार्थं समागताः॥ ६३
उसे देखकर ब्राह्मणदेवताको बड़ा आनन्द हुआ और उसने स्वयं ही उसके सब संस्कार किये। इस समाचारसे और सब लोगोंको भी बड़ा आश्चर्य हुआ और वे बालकको देखनेके लिये आये॥ ६३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.4.63 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 60) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/4/63/