श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.10

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

पाशं कण्ठे निधायास्य तन्मृत्युमुपचक्रमुः।

त्वरितं न ममारासौ चिन्तायुक्तास्तदाभवन्॥ १०

pāśaṃ kaṇṭhe nidhāyāsya tanmṛtyumupacakramuḥ|

tvaritaṃ na mamārāsau cintāyuktāstadābhavan|| 10

अर्थ

इसे मारकर हम इसका माल-मता लेकर जहाँ-कहीं चली जायँगी।’ ऐसा निश्‍चय कर उन्होंने सोये हुए धुन्धुकारीको रस्सियोंसे कस दिया और उसके गलेमें फाँसी लगाकर उसे मारनेका प्रयत्न किया। इससे जब वह जल्दी न मरा तो उन्हें बड़ी चिन्ता हुई॥ ९-१०॥

यह अर्थ श्लोक 9–10 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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