श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.11

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

तप्ताङ्गारसमूहांश्‍च तन्मुखे हि विचिक्षिपुः।

अग्‍निज्वालातिदुःखेन व्याकुलो निधनं गतः॥ ११

taptāṅgārasamūhāṃśca tanmukhe hi vicikṣipuḥ|

agnijvālātiduḥkhena vyākulo nidhanaṃ gataḥ|| 11

अर्थ

तब उन्होंने उसके मुखपर बहुत-से दहकते अँगारे डाले; इससे वह अग्‍निकी लपटोंसे बहुत छटपटाकर मर गया॥ ११॥

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