श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.12

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

तं देहं मुमुचुर्गर्ते प्रायः साहसिकाः स्त्रियः।

न ज्ञातं तद्रहस्यं तु केनापीदं तथैव च॥ १२

taṃ dehaṃ mumucurgarte prāyaḥ sāhasikāḥ striyaḥ|

na jñātaṃ tadrahasyaṃ tu kenāpīdaṃ tathaiva ca|| 12

अर्थ

उन्होंने उसके शरीरको एक गड्ढेमें डालकर गाड़ दिया। सच है, स्त्रियाँ प्रायः बड़ी दुःसाहसी होती हैं। उनके इस कृत्यका किसीको भी पता न चला॥ १२॥

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