॥ श्रीहरिः ॥
लोकैः पृष्टा वदन्ति स्म दूरं यातः प्रियो हि नः।
आगमिष्यति वर्षेऽस्मिन् वित्तलोभविकर्षितः॥ १३
lokaiḥ pṛṣṭā vadanti sma dūraṃ yātaḥ priyo hi naḥ|
āgamiṣyati varṣe'smin vittalobhavikarṣitaḥ|| 13
अर्थ
लोगोंके पूछनेपर कह देती थीं कि ‘हमारे प्रियतम पैसेके लोभसे अबकी बार कहीं दूर चले गये हैं, इसी वर्षके अन्दर लौट आयेंगे’॥ १३॥
लोकैः पृष्टा वदन्ति स्म दूरं यातः प्रियो हि नः।
आगमिष्यति वर्षेऽस्मिन् वित्तलोभविकर्षितः॥ १३
लोगोंके पूछनेपर कह देती थीं कि ‘हमारे प्रियतम पैसेके लोभसे अबकी बार कहीं दूर चले गये हैं, इसी वर्षके अन्दर लौट आयेंगे’॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.5.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 63) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/5/13/