yasmiṃstīrthe tu saṃyāti tatra śrāddhamavartayat|| 19
अर्थ
तब उसे अनाथ समझकर उन्होंने उसका गयाजीमें श्राद्ध किया; और भी जहाँ-जहाँ वे जाते थे, उसका श्राद्ध अवश्य करते थे॥ १९॥
अनाथं तं विदित्वैव गयाश्राद्धमचीकरत्।
यस्मिंस्तीर्थे तु संयाति तत्र श्राद्धमवर्तयत्॥ १९
तब उसे अनाथ समझकर उन्होंने उसका गयाजीमें श्राद्ध किया; और भी जहाँ-जहाँ वे जाते थे, उसका श्राद्ध अवश्य करते थे॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.5.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 63) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/5/19/