श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.19

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

अनाथं तं विदित्वैव गयाश्राद्धमचीकरत्।

यस्मिंस्तीर्थे तु संयाति तत्र श्राद्धमवर्तयत्॥ १९

anāthaṃ taṃ viditvaiva gayāśrāddhamacīkarat|

yasmiṃstīrthe tu saṃyāti tatra śrāddhamavartayat|| 19

अर्थ

तब उसे अनाथ समझकर उन्होंने उसका गयाजीमें श्राद्ध किया; और भी जहाँ-जहाँ वे जाते थे, उसका श्राद्ध अवश्य करते थे॥ १९॥

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