उसकी इस धमकीसे डरकर और पुत्रके उपद्रवोंसे दुःखी होकर वह रात्रिके समय कुएँमें जा गिरी और इसीसे उसकी मृत्यु हो गयी॥ २॥
इति तद्वाक्यसंत्रासाज्जनन्या पुत्रदुःखतः।
कूपे पातः कृतो रात्रौ तेन सा निधनं गता॥ २
उसकी इस धमकीसे डरकर और पुत्रके उपद्रवोंसे दुःखी होकर वह रात्रिके समय कुएँमें जा गिरी और इसीसे उसकी मृत्यु हो गयी॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.5.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 62) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/5/2/