श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.48

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

दिनान्ते रक्षिता गाथा तदा चित्रं बभूव ह।

वंशैकग्रन्थिभेदोऽभूत्सशब्दं पश्यतां सताम्॥ ४८

dinānte rakṣitā gāthā tadā citraṃ babhūva ha|

vaṃśaikagranthibhedo'bhūtsaśabdaṃ paśyatāṃ satām|| 48

अर्थ

सायंकालमें जब कथाको विश्राम दिया गया, तब एक बड़ी विचित्र बात हुई। वहाँ सभासदोंके देखते-देखते उस बाँसकी एक गाँठ तड़-तड़ शब्द करती फट गयी॥ ४८॥

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