श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.49

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

द्वितीयेऽह्नि तथा सायं द्वितीयग्रन्थिभेदनम्।

तृतीयेऽह्नि तथा सायं तृतीयग्रन्थिभेदनम्॥ ४९

dvitīye'hni tathā sāyaṃ dvitīyagranthibhedanam|

tṛtīye'hni tathā sāyaṃ tṛtīyagranthibhedanam|| 49

अर्थ

इसी प्रकार दूसरे दिन सायंकालमें दूसरी गाँठ फटी और तीसरे दिन उसी समय तीसरी॥ ४९॥

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