श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.81

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

पाञ्चजन्यध्वनिं चक्रे हर्षात्तत्र स्वयं हरिः।

गोकर्णं तु समालिङ्‌ग्‍याकरोत्स्वसदृशं हरिः॥ ८१

pāñcajanyadhvaniṃ cakre harṣāttatra svayaṃ hariḥ|

gokarṇaṃ tu samāliṅgyākarotsvasadṛśaṃ hariḥ|| 81

अर्थ

भगवान् स्वयं हर्षित होकर अपने पांचजन्य शंखकी ध्वनि करने लगे और उन्होंने गोकर्णको हृदयसे लगाकर अपने ही समान बना लिया॥ ८१॥

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