उस मण्डपमें कुछ ऊँचाईपर सात विशाल लोकोंकी कल्पना करे और उनमें विरक्त ब्राह्मणोंको बुला-बुलाकर बैठाये॥ १६॥✎ 1271
ऊर्ध्वं सप्तैव लोकाश्च कल्पनीयाः सविस्तरम्।
तेषु विप्रा विरक्ताश्च स्थापनीयाः प्रबोध्य च॥ १६
उस मण्डपमें कुछ ऊँचाईपर सात विशाल लोकोंकी कल्पना करे और उनमें विरक्त ब्राह्मणोंको बुला-बुलाकर बैठाये॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.6.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 72) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/6/16/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1271 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): ऊँचाई-पर → ऊँचाईपर