श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.17

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

पूर्वं तेषामासनानि कर्तव्यानि यथोत्तरम्।

वक्तुश्चापि तदा दिव्यमासनं परिकल्पयेत्॥ १७

pūrvaṃ teṣāmāsanāni kartavyāni yathottaram|

vaktuścāpi tadā divyamāsanaṃ parikalpayet|| 17

अर्थ

आगेकी ओर उनके लिये वहाँ यथोचित आसन तैयार रखे। इनके पीछे वक्ताके लिये भी एक दिव्य सिंहासनका प्रबन्ध करे॥ १७॥✎ 1271

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
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