श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.22

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

वक्तुः पार्श्वे सहायार्थमन्यः स्थाप्यस्तथाविधः।

पण्डितः संशयच्छेत्ता लोकबोधनतत्परः॥ २२

vaktuḥ pārśve sahāyārthamanyaḥ sthāpyastathāvidhaḥ|

paṇḍitaḥ saṃśayacchettā lokabodhanatatparaḥ|| 22

अर्थ

वक्ताके पास ही उसकी सहायताके लिये एक वैसा ही विद्वान् और स्थापित करना चाहिये। वह भी सब प्रकारके संशयोंकी निवृत्ति करनेमें समर्थ और लोगोंको समझानेमें कुशल हो॥ २२॥✎ 1271

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