॥ श्रीहरिः ॥
मनोरथो मदीयोऽयं सफलः सर्वथा त्वया।
निर्विघ्नेनैव कर्तव्यो दासोऽहं तव केशव॥ ३१
manoratho madīyo'yaṃ saphalaḥ sarvathā tvayā|
nirvighnenaiva kartavyo dāso'haṃ tava keśava|| 31
अर्थ
मेरा यह मनोरथ आप बिना किसी विघ्न-बाधाके सांगोपांग पूरा करें। केशव! मैं आपका दास हूँ’॥ ३१॥
मनोरथो मदीयोऽयं सफलः सर्वथा त्वया।
निर्विघ्नेनैव कर्तव्यो दासोऽहं तव केशव॥ ३१
मेरा यह मनोरथ आप बिना किसी विघ्न-बाधाके सांगोपांग पूरा करें। केशव! मैं आपका दास हूँ’॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.6.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 73) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/mahatmya/padma/6/31/